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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया…

शिमला: हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) धर्मशाला ने अपना नौवां दीक्षांत समारोह राजकीय डिग्री काॅलेज धर्मशाला के सभागार में आयोजित किया । इस समारोह में उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बताैर मुख्यातिथि शिरकत की। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने उप राष्ट्रपति का गगल एयरपोर्ट पर स्वागत किया। इस दाैरान कृषि मंत्री चंद्र कुमार, भाजपा सांसद समेत जिला के प्रशासनिक अधिकारी माैजूद रहे। इसके बाद उप राष्ट्रपति सीधे कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए। उप राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार हिमाचल प्रदेश आए हैं। उप राष्ट्रपति सीयू के 12 मेधावियों को गोल्ड मेडल दिए, जिनमें नौ मेधावी पीजी और तीन यूजी कोर्सों के थे। इसके अलावा आठ मेधावियों को पीजी डिग्री दी। जिन मेधावियों ने अपना पंजीकरण करवाया, उसमें यूजी के 57, पीजी के 415, पीएचडी के 33 और एमफिल के चार मेधावी शामिल रहे। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उप राष्ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश की देव भूमि और वीर भूमि के रूप में प्रशंसा करते हुए कहा कि इस राज्य ने देश के सशस्त्र बलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और यह अपनी समृद्ध मेहमाननवाजी, संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक विश्वविद्यालयों को एक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिक्षा प्रणाली बनाने के लिए संकाय विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए, नवाचार को प्रोत्साहित करना चाहिए और सहयोग को मजबूत करना चाहिए। विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि इस आकांक्षा को साकार करने में छात्र और युवा सबसे महत्वपूर्ण हितधारकों में से हैं, और उन्होंने समावेशी विकास का आह्वान किया, जिसमें समाज का कोई भी राज्य या वर्ग पीछे न छूटे। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता, हिमाचल प्रदेश के कृषि मंत्री चंद्र कुमार, नेता विपक्ष  जयराम ठाकुर भी माैजूद रहे। उप राष्ट्रपति  सीपी राधाकृष्णन ने धर्मशाला स्थित राज्य शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों और घाटियों ने सैनिकों की ऐसी कई पीढ़ियों का पालन-पोषण किया है, जिनके शौर्य और समर्पण ने राष्ट्र को गौरव दिलाया है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे वीर सैनिकों का साहस और बलिदान सदैव राष्ट्र के हृदय में अंकित रहेगा, और यह भावी पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा के सर्वोच्च मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

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