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दिल का ख्याल रखेगा एम्स बिलासपुर, डायमंड ड्रिल से साफ होंगी धमनियां…

बिलासपुर: एम्स बिलासपुर के हृदय रोग विभाग ने दिल की धमनियों में जमा होने वाले पत्थर जैसे कठोर कैल्शियम को हटाने के लिए दुनिया की सबसे उन्नत तकनीक रोटेशनल एथेरेक्टॉमी सिस्टम लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मशीन उन हजारों मरीजों के लिए जीवनदान साबित होगी, जिन्हें धमनियों में अत्यधिक कैल्शियम होने के कारण अब तक इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ या दिल्ली जैसे बाहरी राज्यों के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते थे। इसके लिए खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रोटेशनल एथेरेक्टॉमी सिस्टम को आम बोलचाल में डायमंड ड्रिल कहा जाता है, क्योंकि इसकी कार्यप्रणाली किसी बारीक ड्रिल मशीन जैसी है। इस मशीन के आगे एक छोटा बर लगा होता है, जिस पर असली हीरे के सूक्ष्म कणों की कोटिंग होती है। हीरा दुनिया का सबसे कठोर पदार्थ है, इसलिए यह धमनी के अंदर मौजूद पत्थर जैसे सख्त कैल्शियम को आसानी से घिस सकता है। यह ड्रिल धमनियों के अंदर 1.5 लाख से 1.8 लाख प्रति मिनट चक्कर की तूफानी गति से घूमती है और कठोर ब्लॉकेज को बारीक पाउडर की तरह पीस देती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल कठोर कैल्शियम को काटती है, जबकि दिल की नसों की कोमल दीवारों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। यह पूरी तरह से सुई के जरिये होने वाला इलाज है, जिसमें मरीज को बड़ा कट नहीं लगता। अब तक जिन मामलों में ओपन हार्ट बाईपास सर्जरी ही एकमात्र विकल्प था, वहां अब महज एक छोटे छेद के जरिये इलाज संभव होगा। अब तक इस विशिष्ट तकनीक के लिए मरीजों को चंडीगढ़ या दिल्ली भागना पड़ता था। अब प्रदेश के मरीजों को बाहरी राज्यों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उम्रदराज मरीजों में कैल्शियम जमने की समस्या अधिक होती है। उनके लिए यह तकनीक जीवनदान से कम नहीं है। कैल्शियम पूरी तरह साफ होने से स्टेंट (छल्ला) अपनी जगह पर सही बैठता है और पूरी क्षमता से खुल पाता है, जिससे भविष्य में दोबारा ब्लॉकेज का खतरा न्यूनतम हो जाता है।

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