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राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस: बीमारी है या नहीं…जानने में लगते हैं डेढ़ महीने, इलाज में न करें जल्दबाजी

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National Cancer Awareness Day: कैंसर किसी को हुआ है या हो सकता है, यह सुनकर कोई भी चिंतित हो जाता है। इसके पीछे की वजह बीमारी की सही जानकारी न होना और इलाज में अधिक खर्च होना है। कौन सा कैंसर हुआ है और इसके इलाज के बारे में पता होना जरूरी है। किसी तरह की जल्दीबाजी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है। आईएमएस बीएचयू के सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के प्रो. मनोज पांडेय ने बताया कि कैंसर है या नहीं, जांच क्या होगी? यह जानने में डेढ़ महीने तक का समय लगता है। जल्दबाजी से लोगों को बचना चाहिए। आईएमएस बीएचयू, महामना कैंसर संस्थान सहित अन्य जगहों पर हर दिन कैंसर के प्रारंभिक लक्षण वाले 100 मरीज आते हैं। स्क्रीनिंग और जांच के बाद ही पुष्टि होती है। कैंसर के प्रति जागरूकता को लेकर हर साल सात नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है। प्रो. मनोज पांडेय ने बताया कि कैंसर एक गंभीर बीमारी है लेकिन लाइलाज नहीं। इलाज के पहले बहुत सारी जांच करानी पड़ती है। इससे किस स्टेज का कैंसर है और इसका क्या सही इलाज होगा सारी जानकारी मिलती है। इन सब जांच में डेढ़ महीने लगते हैं। फेफड़े के कैंसर में जीन टेस्टिंग भी होती है।

बिना पुष्टि दवा शुरू करने से साइडिफेक्ट
प्रो. मनोज पांडेय का कहना है कि कैंसर की पुष्टि के लिए बायोप्सी जरूरी होती है। भ्रांति है कि इसमें शरीर का भाग काट लिया जाता है। यह जानना बहुत जरूरी है कि मरीज की बायोप्सी (शरीर से ऊतक का एक छोटा टुकड़ा जांच के लिए निकालना) होती है। बिना कैंसर की पुष्टि के दवा करने से साइड इफेक्ट और खर्च झेलना पड़ सकता है। बायोप्सी एक आवश्यक जांच है और इसे करने से शरीर में कैंसर फैलता नहीं है।

चार हफ्ते में न भरें घाव तो कैंसर, उम्र बढ़ने पर खतरा अधिक
ज्यादातर तंबाकू और शराब के सेवन से कैंसर होता है, लेकिन कैंसर जीन में म्युटेशन से भी हो सकता है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को सकता है। उम्र बढ़ने के साथ साथ कैंसर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। प्रो. मनोज के अनुसार शरीर कमजोर होने लगता है और म्यूटेशंस को रिपेयर नहीं कर पाता है। कोई भी घाव जो 4 हफ्ते में न भरे या कोई भी गांठ जो कम न हो तो यह कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

जागरूकता के लिए यह भी जानना जरूरी
  • कोई भी सर्जन कैंसर की सर्जरी नहीं कर सकता है। विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है। मेडिकल में एमएस की डिग्री के बाद तीन साल कैंसर सर्जरी में एमसीएच करना होता है।
  • प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान) के तहत कैंसर का इलाज निशुल्क होता है।
  • जिनके पास ये कार्ड नहीं होता है, वह प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री से अनुदान की अपील कर सकते हैं।
  • कैंसर के मरीज को घर का बना खाना चाहिए। कुछ विशेष खाने की जरूरत नहीं है। खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ़ानी चाहिए। फलों और सब्जियों का सेवन जरूरी है।

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