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राज्यसभा चुनाव पर हिमाचल हाई कोर्ट का हर्ष महाजन को बड़ा आदेश, जानिए पूरी ख़बर ?

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव में राज्यसभा सदस्य हर्ष महाजन को याचिकाकर्ता अभिषेक मनु सिंघवी के उठाए कानूनी मुद्दों पर प्रतिक्रिया देने के आदेश जारी किए हैं। सिंघवी ने हर्ष के चुनाव को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। न्यायाधीश बीसी नेगी के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान सिंघवी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जब दोनों उम्मीदवारों को बराबर मत प्राप्त हुए थे तो वास्तव में जो नियम उस समय लागू किए थे, उनके स्थान पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के कुछ अन्य प्रविधानों को लागू करना आवश्यक था। याचिकाकर्ता के अनुसार रिटर्निंग आफिसर को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 65 के प्रविधानों के अनुसार परिणाम निर्धारित कर सिंघवी को सफल उम्मीदवार घोषित करना चाहिए था। सिंघवी के अनुसार, निर्वाचन अधिकारी द्वारा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 65 का पालन न करने और नियम 75(4) और नियम 81(3) के त्रुटिपूर्ण प्रयोग के कारण चुनाव परिणाम भौतिक रूप से प्रभावित हुआ है। इस मामले में विचारणीय मुद्दा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के सही प्रविधानों को लागू करने से संबंधित है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 65 लागू होनी चाहिए थी और नियम 75(4) और नियम 81(3) का प्रयोग गलत है। सबसे पहले अदालत द्वारा इस पर प्रारंभिक विचार किया जाना चाहिए क्योंकि यह पूर्णतः कानून का प्रश्न है। सिंघवी का तर्क है कि इस मामले में कानून के गलत प्रविधानों का हवाला देकर अवैधता की गई है जिसमें दोनों पक्षों ने भाग लिया। ऐसे मामले में जनहित के अनुरूप न्यायालय को किसी पक्षकार के पक्ष में कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे ऐसा करने से किसी ऐसे कार्य की पुष्टि हो, जो कानून के विपरीत हो। तर्क दिया कि कानून के विरुद्ध की किसी कार्यवाही का विरोध करने पर प्रभावित पक्ष को कोई रोक नहीं सकता।

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