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दिव्यांगजनों को सहानुभूति नहीं, बल्कि समान अवसर, सम्मान और प्रोत्साहन मिलना चाहिए: राज्यपाल

सुंदरनगर : राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने मंडी के सुन्दरनगर में समावेशी समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान करते हुए कहा कि दिव्यांगजनों को अपनी प्रतिभा और क्षमता का पूर्ण प्रदर्शन करने के लिए समान अवसर, सम्मान और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
राज्यपाल आज स्पेशल ओलंपिक्स भारत, हिमाचल प्रदेश द्वारा आयोजित ‘दीपावली उत्सव-2026 विशेष बच्चों की क्षमताओं का उत्सव’ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में हिमाचल प्रदेश के विशेष खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन पूरे प्रदेश और देश के लिए गौरव का विषय है। उनकी उपलब्धियां दृढ़ संकल्प, समावेशिता और उत्कृष्टता की सच्ची मिसाल हैं
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में समावेशी विकास और समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि विकास की प्रक्रिया में कोई भी वर्ग पीछे न छूटे। उन्होंने वर्ष 2015 में पहली बार विशेष ओलंपिक पदक विजेताओं को केंद्र सरकार की नकद पुरस्कार योजना में शामिल करने के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि इससे उनके खेल प्रदर्शन को उचित पहचान और सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में इस योजना में किए गए संशोधन से भी दिव्यांगजनों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट दृष्टिकोण रहा है कि दिव्यांगजनों को सहानुभूति नहीं, बल्कि समान अवसर, सम्मान और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। स्पेशल ओलंपिक्स जैसे मंच इस संकल्पना को धरातल पर साकार कर रहे हैं। ये मंच विशेष बच्चों को अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने, उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के अवसर प्रदान करते हैं।
राज्यपाल ने इटली के ट्यूरिन में आयोजित वर्ल्ड विंटर गेम्स में हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ियों की शानदार उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पदक विजेता खिलाड़ियों शालिनी, अनिल कुमार, आकृति, गिरिधर और हेमचंद को बधाई दी। उन्होंने शिवांजलि और शुभम के प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने प्रदेश में खेल केंद्रों को सहयोग प्रदान करने के लिए एनएचपीसी के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के सात खिलाड़ियों और चार प्रशिक्षकों को वर्ल्ड विंटर गेम्स में भाग लेने का अवसर मिला। उन्होंने खिलाड़ियों को तैयार करने में बीबीएमबी, प्रशिक्षकों, संस्थानों और परिवारों के निरंतर सहयोग की भी सराहना की।
राज्यपाल ने चेतना संस्था, साकार स्पेशल स्कूल, सहयोग स्पेशल स्कूल, सीआरसी एवं विभिन्न संस्थानों के बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना की। उन्होंने स्पेशल ओलंपिक्स भारत के संदेश ‘ईच वन-रीच वन’ का उल्लेख करते हुए परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों से समावेशिता के इस अभियान को व्यापक बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित खिलाड़ियों, अभिभावकों, शिक्षकों, प्रशिक्षकों और आयोजकों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम सभी को मिलकर ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए, जहां प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, समान अवसर और आगे बढ़ने की स्वतंत्रता प्राप्त हो। इस अवसर पर राज्यपाल ने अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हिमाचल प्रदेश के विशेष खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को सम्मानित किया। उन्होंने विभिन्न संस्थानों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन कर उनकी गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त की
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने लोगों से प्रदर्शनी में लगाए गए स्टॉलों पर विशेष बच्चों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को खरीदने और उन्हें प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन बच्चों की रचनात्मक कृतियों को प्रोत्साहन देना न केवल उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास को बढ़ावा देगा, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। स्पेशल ओलंपिक्स भारत की अध्यक्ष डॉ. मलिका नड्डा ने कहा कि संस्था ‘इन्क्लूजन रिवोल्यूशन’ के माध्यम से बौद्धिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। यह अभियान समानता, एकता और सद्भाव की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि स्पेशल ओलंपिक्स भारत खेल, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी पहलों के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न अवसर उपलब्ध करवा रहा है।
डॉ. नड्डा ने भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय खिलाड़ियों ने वर्ष 2023 में बर्लिन में आयोजित वर्ल्ड समर गेम्स में कुल 202 पदक जीते थे, जबकि वर्ष 2025 में इटली में आयोजित वर्ल्ड विंटर गेम्स में भारतीय दल ने 33 पदक हासिल किए। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए बताया कि भारतीय दल के कुल 30 खिलाड़ियों में से 15 खिलाड़ी हिमाचल प्रदेश के थे, जिन्होंने देश के कुल 33 पदकों में से 22 पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। उन्होंने 28 खिलाड़ियों को कुल 2.56 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान करने के लिए युवा मामले एवं खेल मंत्रालय का आभार व्यक्त किया। साथ ही, खिलाड़ियों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सुलभ एवं आधुनिक खेल अवसंरचना विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज त्रिपाठी ने बोर्ड की विभिन्न गतिविधियों, प्रदेश के विकास में योगदान तथा भविष्य की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। स्पेशल ओलंपिक्स भारत, जिला मंडी चैप्टर के अध्यक्ष जगदीश राणा ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन, बीबीएमबी एवं जिला प्रशासन के अधिकारी तथा अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।

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