शिमला: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार को सुप्रीम कोर्ट से एक और बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने ‘हिमाचल प्रदेश रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एक्ट, 2024′ को लेकर राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका (Review Petition) को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश के करीब 1.50 लाख कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने के आसार बन गए हैं। गौरतलब है कि सुक्खू सरकार ने 2024 में इस विधेयक को विधानसभा से पारित कराया था, जिसके तहत अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों की सेवा अवधि और वित्तीय लाभों से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए थे। इस नए कानून में व्यवस्था की गई थी कि अनुबंध अवधि के दौरान कर्मचारियों को नियमित कर्मियों के समान लाभ नहीं दिए जाएंगे। साथ ही, धारा 6 के तहत नियमितीकरण की तिथि से मिलने वाले सेवा लाभों के प्रावधान को भी खत्म कर दिया गया था। कर्मचारी संगठन इस कानून का लगातार विरोध कर रहे थे और इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे।हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल 2026 को इस एक्ट को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी, जिसे अदालत ने 29 जुलाई 2026 को खारिज करते हुए बकाया भुगतान के लिए चार महीने का समय दिया था। इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की थी, जिसे अब पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। अदालत में सरकार की मुख्य दलील यह थी कि राज्य आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और 8 से 10 हजार करोड़ रुपये के एरियर का बोझ खजाने पर डालना संभव नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद अब सरकार के पास कर्मचारियों को उनका बकाया एरियर देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।





