धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के डिप्टी सीएम और जल शक्ति मंत्री मुकेश अग्निहोत्री के विभाग में ऑउटसोर्स पर तैनात कर्मचारी पिछले पांच महीने से सैलरी के लिए तरस रहे हैं. जल शक्ति विभाग में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर और डाटा एंट्री ऑपरेटर्स को पिछले पांच महीने से सरकार सैलरी नहीं दे पाई है. ये कर्मचारी कई ही बार विभाग के अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है. नाम ना छापने की शर्त पर एक डाटा एंट्री ऑपरेटर ने बताया कि पांच महीने से सैलरी नहीं मिली है और परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो गया है। उधर, जल शक्ति विभाग में कार्यरत पैरा वर्कर के लिए न तो पॉलिसी बनाई गई है और न ही इस वर्ग को सम्मानजनक वेतन दिया जा रहा है और प्रदेश सरकार के इस बार के बजट से भी इस वर्ग को निराशा हाथ लगी है. ऐसे में अब पैरा वर्कर एक बार फिर से सीएम के समक्ष अपनी मांगें रखेंगे, यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अप्रैल माह के पहले सप्ताह में शिमला में विधानसभा का घेराव किया जाएगा. इसके लिए प्रदेश भर के पैरा वर्कर परिवारों सहित शिमला कूच करेंगे. यह ऐलान जल शक्ति विभाग पैरा वर्कर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष अंकुश ने धर्मशाला में पत्रकार वार्ता के दौरान किया। उन्होंने कहा कि पैरा वर्कर, पैरा फीटर व मल्टीपर्पज वर्कर अपनी सेवाएं ईमानदारी से दे रहे हैं, फिर भी सरकार इस वर्ग को अनदेखा कर रही है. प्रदेश सरकार ने वर्तमान बजट में पैरा वर्कर के वेतन में 500 रुपये की नाममात्र बढ़ोतरी की है, जबकि पिछले वर्ष घोषित वृद्धि का अभी तक एरियर नहीं दिया गया है. पैरा वर्कर के ऊना में आयोजित सम्मेलन में डिप्टी सीएम एवं जल शक्ति विभाग के मंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था, इसके बावजूद बजट में कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि आपदा के समय पैरा वर्कर कामों की न्यूज कटिंग को डिप्टी सीएम अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करते थे, जबकि बजट में इस वर्ग को अनदेखा किया गया है. उन्होंने कहा कि आंदोलन की राह पर जाने से पहले एक बार सीएम से मिलकर पुन: मांगों को उनके समक्ष रखा जाएगा, यदि सरकार कोई ऐलान करती है तो सरकार का धन्यवाद किया जाएगा, लेकिन यदि मांगों को फिर से अनदेखा किया गया तो अप्रैल माह के पहले सप्ताह में प्रदेश भर के दस हजार से अधिक पैरा वर्कर शिमला में परिवारों सहित विधानसभा घेराव करेंगे।





