शिमला : हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिमला में हाल ही में पकड़े गए लगभग एक करोड़ रुपये के एलएसडी (LSD) ड्रग मामले ने न सिर्फ अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, बल्कि स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के कुछ कर्मियों की भूमिका को भी संदेह के घेरे में ला दिया है। पुलिस की जांच में पता चला है कि आरोपियों ने एलएसडी को किताब में छिपाकर शिमला पहुंचाया था। पुलिस की छानबीन में नशे की सप्लाई के तार गोवा से जुड़ रहे हैं। प्रदेश सरकार ने जिन्हें नशे के खिलाफ कार्रवाई के लिए विशेष जिम्मेदारी दी है, उन्हीं स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) में से चार कर्मियों की भूमिका संदेह के दायरे में आ गई है। शिमला पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है। इन पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें दो हेड कांस्टेबल और दो कांस्टेबल शामिल हैं। सीआईडी और शिमला पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही हैं। पुलिस के मुताबिक मुख्य सप्लायर नविएल हैरिसन से पूछताछ और मामले में तकनीकी पहलुओं को खंगालने के बाद पता चला है कि गोवा से राजस्थान और दिल्ली से होकर एनलएसडी की तस्करी होती है। यहां से शिमला इस नशे को लाया गया था। पुलिस मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। इसके साथ ही बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। नशे की एक डोज की कीमत उसकी गुणवत्ता के हिसाब से दस हजार रुपये प्रति स्टि्रप तक हो सकती है। इसमें लाखों, करोड़ों रुपये के मुनाफे की वजह से ही इसकी तस्करी में बड़े नेटवर्क का हाथ होता है। राजधानी शिमला में इसकी इतनी बड़ी मात्रा में पकड़े जाने के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि आखिरकार इस जानलेवा नशे की खपत कहां-कहां हो रही है। अभी तक पुलिस इस मामले में संदीप शर्मा निवासी पंजाब, प्रिया शर्मा सिरमौर और नशे के सप्लायर नविएल हैरिसन को गिरफ्तार कर चुकी है। नविएल हैरिसन केरल का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक नविएल हैरिसन और संदीप दोनों एलएसडी नशे की तस्करी को लेकर काफी समय से सक्रिय थे। पुलिस ने 10 मार्च को न्यू शिमला में एक कमरे में दबिश देकर 11.570 ग्राम एलएसडी के साथ इन्हें गिरफ्तार किया था। एलएसडी के 562 स्टि्रप की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक करोड़ रुपये आंकी जा रही है। पुलिस को जांच के दौरान फॉयल पेपर से यह नशा मिला था। इसके साथ ही पुलिस ने तीन सिरिंज भी बरामद किए गए हैं। एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि एलएसडी मामले के हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है। अभी तक की जांच में सामने आया है कि नशे की तस्करी किताब में छिपाकर की थी। पुलिस आरोपियों के बैंक खातों के साथ ही उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जानकारी जुटा रही है।





