Home » Uncategorized » छात्र अगले साल से हिमाचल के प्राचीन मंदिरों और स्वतंत्रता आंदोलन का पढ़ेंगे इतिहास

छात्र अगले साल से हिमाचल के प्राचीन मंदिरों और स्वतंत्रता आंदोलन का पढ़ेंगे इतिहास

शिमला: हिमाचल प्रदेश में छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी राष्ट्र के इतिहास के साथ-साथ हिमाचल की संस्कृति, प्राचीन मंदिरों और स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में भी पढ़ेंगे। शैक्षणिक सत्र 2027-28 के पाठ्यक्रम में इतिहास की किताब में पझौता आंदोलन के अलावा हिमाचल का इतिहास भी पढ़ाया जाएगा। प्रदेश सरकार समेत शिक्षा निदेशालय ने इस पर कार्य शुरू कर दिया है। मंगलवार को एससीईआरटी सोलन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान पाठ्यक्रम को लेकर शिक्षा विभाग ने पहला ड्राफ्ट शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के समक्ष पेश किया। इसमें मंत्री ने भी कई सुझाव दिए। ड्राफ्ट में बताया गया कि छठी से आठवीं कक्षा तक इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव किया जा रहा है। इसमें इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि पुस्तकों में किताबी ज्ञान के साथ रचनात्मक सोच, जीवन से जुड़े कौशल, प्रदेश की संस्कृति, कला, साहित्य, प्राचीन मंदिरों, किलों और प्रजामंडल एवं सिरमौर के पझौता आंदोलन जैसे स्वतंत्रता संग्राम के विषयों को शामिल किया जाए। स्वतंत्रता संग्राम में अपनी वीरता के माध्यम से देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले वीरों की विस्तृत जानकारी भी पाठ्यक्रम में होगी, ताकि युवा पीढ़ी इसे जान सके। पाठ्यक्रम में प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों, लोक कलाओं और महत्वपूर्ण व्यक्तियों के साथ-साथ हिमाचल पर केंद्रित प्रागैतिहासिक काल से लेकर हिमाचल के राज्य बनने तक की सारगर्भित जानकारी भी होगी। शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में एससीईआरटी समेत अन्य टीम के सदस्य हिमाचल इतिहास को लेकर शिक्षण सामग्री को जुटा रहे हैं। जब भी भारत छोड़ो आंदोलन की बात होती है, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला में हुए पझौता आंदोलन की याद ताजा हो जाती है। यहां मुठ्ठी भर लोग अंग्रेज सरकार व उसकी मददगार स्थानीय रियासत के आगे खड़े हो गए थे। चंद लोगों से शुरू हुआ पझौता आंदोलन कुछ ही समय में गांव-गांव तक पहुंच गया था। 1942 में जब महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया तो लोगों का उत्साह बढ़ गया। आंदोलन का नेतृत्व वैद्य सूरत सिंह के साथ चेत सिंह, बस्तीराम पहाड़िया, गुलाब सिंह व मान सिंह ने किया। यह आंदोलन पझौता क्षेत्र से शुरू हुआ था, इसलिए इसे पझौता आंदोलन नाम दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[adsforwp id="47"]