शिमला: हिमाचल प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का कहना है कि प्रदेश कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है। विकास पर पूर्णविराम लग गया है। कर्मचारियों व पेंशनर्स के वित्तीय लाभ का भुगतान नहीं हो पा रहा है। नौकरियां नहीं मिल रही हैं। हमारी सरकार के समय शुरू हुईं जनहित की योजनाओं को लोग आज भी याद करते हैं। हिमाचल को फिर से पटरी पर लाने के लिए कड़े और बड़े फैसले लेने होंगे। जयराम ठाकुर ने दैनिक जागरण के बनोई स्थित प्रेस परिसर में हिमाचल के मुद्दों पर खुलकर बात की। प्रदेश का हेल्थ सिस्टम खुद क्रिटिकल हो चुका है। सरकार सिर्फ झूठ के सहारे काम कर रही है। पिछले हफ्ते रामपुर में एक ऐसा मामला सामने आया, जहां एक महिला ढांक से गिर गई और उसे दो अस्पतालों में ले जाया गया। दोनों जगह डाक्टर ही नहीं थे और इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई। हमारी सरकार के समय में अस्पतालों में निश्शुल्क जांच की सुविधा मिलती थी, आज नहीं मिल रही है। जननी सुरक्षा के तहत जो बेहद सस्ती दवाई है और बेहद आवश्यक, वह भी उपलब्ध नहीं है। इमरजेंसी में सीरिंज नहीं मिलने के मामले आए दिन अखबारों में छपते हैं। केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई राशि का सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। न ही पूरा बजट खर्च हो पा रहा है। स्वास्थ्य की पूरी व्यवस्था ही आइसीयू में है और जिम्मेदार मस्त हैं। आइजीएमसी शिमला में हुई मारपीट का प्रकरण भी सरकार की नाकामी का उदाहरण है। आपातकाल में लोगों को अस्पताल पहुंचने वाले एंबुलेंस कर्मी हड़ताल पर थे। सरकार ने उनसे बातचीत कर समाधान करने की जहमत तक नहीं उठाई। सरकार की नीयत प्रदेशवासियों का हित करना नहीं है। अपने पहले दिन से ही सरकार ने यह साफ कर दिया था। बिना मंत्रिमंडल के गठन के ही हजारों संस्थानों पर एक झटके में बंद करना, कैसे संभव था? सिर्फ हिमकेयर योजना ही नहीं, सहारा, शगुन, स्वावलंबन जैसी योजनाएं भी बंद कर दी या उनका बजट रोक दिया है। हिमकेयर योजना तो एक सपने के सच होने जैसी थी। जो लोग आयुष्मान से रह गए थे, उन्हें भी इलाज मिले, इसके लिए हमारी सरकार ने हिमकेयर योजना चलाई थी। इस योजना के ऐसे लाभार्थी मुझे मिलते थे, जिन्होंने गरीबी को देखते हुए बीमारी का इलाज न करवाने का मन बना लिया था। कारण था कि उपचार बहुत महंगा था।





