शिमला: पंचायत राज विभाग ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए पंचायतों की ओर से जारी किए जाने वाले अनापत्ति प्रमाण पत्र को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश सरकार ने सोमवार को इस सबंध में अधिसूचना जारी की है। एनओसी जारी करने और अस्वीकृत करने की सेवा को पूरी तरह डिस्ट्रिक्ट पोर्टल से जोड़ा गया है। इसके बाद पंचायतें मैनुअल तरीके से एनओसी जारी नहीं कर सकेंगी। इससे पहले पंचायत सचिव राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर पंचायत व सार्वजनिक परिसंपत्तियों की जांच करेगा। इसके बाद प्रस्ताव पारित कर कारण दर्ज किए जाएंगे। सभी आवेदन और प्रमाण पत्र केवल ऑनलाइन ही संसाधित किए जाएंगे। पंचायतों में होने वाली ग्राम सभाओं को अब बीडीओ और एसडीएम कार्यालय के कर्मचारी भी ऑनलाइन जुड़ेंगे। पंचायतों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। जहां पर ग्राम सभा की बैठक होती है, उस हॉल में भी कैमरे लगे होंगे। ग्राम सभाओं में पारित होने वाले प्रस्ताव को लेकर कोई गड़बड़ी न हो। इसके चलते यह फैसला लिया गया है। सरकार के ध्यान में मामला आया है कि कई बार चहेतों को फायदा देने के लिए ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित किए जाते हैं। ऐसे में पंचायतीराज विभाग ने फैसला लिया है कि ग्राम सभाओं में बीडीओ भी ऑनलाइन जुड़ेंगे।
एनओसी अस्वीकृति का वैध आधार
- यदि प्रस्तावित निर्माण पंचायत या सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण करता हो।
- सड़क, रास्ता, पेयजल व सीवरेज पाइपलाइन, नाली, खेल मैदान या पंचायत द्वारा संधारित किसी ढांचे को नुकसान पहुंचाता हो, इन्हीं कारणों के अलावा किसी अन्य आधार पर एनओसी रोका नहीं जा सकेगा।
ये रहेगी प्रक्रिया
- पंचायत सचिव राजस्व रिकार्ड से पंचायत व सार्वजनिक संपत्ति की जांच करेगा।
- आवश्यकता पड़ने पर मौके पर सत्यापना होगा।
- पंचायत बैठक में प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
- प्रस्ताव के आधार पर एनओसी जारी किया जाएगा।
- ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल अनिवार्य।
- सेवा सक्रिय होने के बाद मैनुअल एनओसी जारी नहीं की जाएगी।
- सभी आवेदन और प्रमाणपत्र आनलाइन होंगे।
क्यों है यह फैसला अहम
- लोगों को पंचायत स्तर पर अनावश्यक परेशानियों से राहत।
- भवन निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता।
- पंचायतों की जवाबदेही तय व अतिक्रमण रोकने में मदद।





