शिमला : शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए राज्य सरकार अब नए पैटर्न पर काम करने जा रही है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्धता वाले सरकारी स्कूलों के लिए शिक्षकों का सब कैडर बनाया जाएगा। स्कूल शिक्षा निदेशालय इसके लिए नियम तैयार करने में जुटा है। एक बार शिक्षक की जिस स्कूल में नियुक्ति होगी, उसकी सेवानिवृत्ति उसी स्कूल से होगी। यानी सेवाकाल के दौरान वह उसी स्कूल में पढ़ा सकेगा। इस प्रविधान के पीछे कई तर्क दिए जा रहे हैं।पहला तर्क यह है कि शिक्षक को तबादले का डर नहीं रहेगा। दूसरा, उसे अपने छात्रों की कमजोरियों का पता रहेगा, जिससे वह अगली कक्षा में सुधार कर सकेगा। तीसरा, सरकारी स्कूलों के शिक्षक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने भेजते हैं। जब वे स्वयं सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में रहेंगे, तो बच्चों को भी वहीं पढ़ाएंगे, जिससे दाखिले भी बढ़ेंगे। शिक्षा विभाग इस पर कानूनी राय भी ले रहा है। पदोन्नति (जैसे टीजीटी से प्रवक्ता और प्रवक्ता से प्रधानाचार्य) होने की स्थिति में शिक्षक का तबादला किया जा सकेगा, लेकिन यह तब होगा जब उस स्कूल में पद रिक्त न हो। अन्यथा तबादला केवल सीबीएसई संबद्धता वाले सरकारी स्कूल में ही किया जाएगा। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इसका प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए कैबिनेट को भेजने की योजना बनाई है। विभाग कुछ और विकल्प भी सुझाएगा, जिसमें कहा गया है कि यदि शिक्षक का तबादला करना आवश्यक है, तो एक स्कूल में न्यूनतम सेवाकाल की शर्त को तीन साल से बढ़ाकर अधिक किया जाए।
दिसंबर में शुरू होगी प्रक्रिया
शिक्षा विभाग दिसंबर में सीबीएसई सब कैडर में आने के लिए शिक्षकों से आवेदन मांगेगा। विभाग का कहना है कि प्राथमिकता उसी स्कूल के शिक्षक को दी जाएगी। यदि आवेदन अधिक आते हैं, तो शिक्षकों के साक्षात्कार या लिखित परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। जनवरी में विभाग इस प्रक्रिया को पूरा कर देगा, क्योंकि 15 फरवरी से नया सत्र शुरू हो जाएगा। कक्षा छह से 10 तक हर विषय के लिए शिक्षक उपलब्ध रहेंगे। 11वीं और 12वीं में वाणिज्य, विज्ञान और कला संकाय के विकल्प भी होंगे। जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति का समय पांच साल से कम है, उन्हें तैनात नहीं किया जाएगा। वेतन और अन्य वित्तीय लाभ में कोई अंतर नहीं होगा। 97 स्कूलों ने सीबीएसई की संबद्धता के लिए आवेदन किया है, जिनमें से लगभग 35 स्कूलों की संबद्धता पुष्टि हो चुकी है।





