Home » Uncategorized » सुक्खू सरकार से नाराज दृष्टिबाधित संघ, मांगे ना माने जाने पर नग्न होकर प्रदर्शन की दी चेतावनी

सुक्खू सरकार से नाराज दृष्टिबाधित संघ, मांगे ना माने जाने पर नग्न होकर प्रदर्शन की दी चेतावनी

शिमला: पिछले दो वर्षों से शिमला में दृष्टिहीन जन संगठन अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत है। शिमला के कालीबाड़ी मंदिर परिसर में ये लोग पिछले 704 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के इतिहास में इसे अब तक का सबसे लंबा आंदोलन माना जा रहा है। मांगे पूरी न होने पर संगठन समय-समय पर चक्का जाम करता रहा है। आज फिर सचिवालय के बाहर दृष्टिबाधितों ने धरना-प्रदर्शन किया और सरकार को कड़ी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे नग्न होकर प्रदर्शन करने को विवश होंगे। उन्होंने कहा कि इस स्थिति की पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। दृष्टिहीन जन संगठन के सचिव राजेश ठाकुर ने बताया कि संगठन विभिन्न विभागों में दृष्टिहीनों के खाली पड़े बैकलॉग पदों को एकमुश्त भरने की मांग कर रहा है। सरकार से कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। राजेश ठाकुर ने बताया कि जब भी वे चक्का जाम करते हैं, सरकार वार्ता के लिए बुलाती है, लेकिन बाद में किसी ठोस कार्रवाई का अभाव रहता है। उनका कहना है कि लंबे समय से अपने हक़ की लड़ाई लड़ने के बावजूद बजट में दृष्टिहीनों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया, न ही भर्तियां शुरू की गई हैं। गौरतलब है कि दृष्टिबाधित संगठन का कहना है कि वर्ष 1995 के बाद से उनके कोटे के पद नहीं भरे गए हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इन पदों पर भर्तियां करने के आदेश दिए हैं। दृष्टिबाधितों का कहना है कि अब उनका सब्र का बांध टूट चुका है अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो वे सचिवालय के बाहर आमरण अनशन और नग्न प्रदर्शन करेंगे।बता दें कि, दृष्टिबाधित लंबे समय से बैकलॉग भर्तियों की मांग कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि विभिन्न सरकारी विभागों में दिव्यांग कोटे के तहत खाली पड़े हजारों पदों पर योग्य दृष्टिबाधितों को उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी दी जाए। अपनी मांगों को लेकर संघ शिमला में 700 से अधिक दिनों से हड़ताल पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों को अनसुना कर रही है।सरकार की अनदेखी के बाद अब उन्होंने अपने आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया है। इससे पहले भी दृष्टिहीन कई बार सचिवालय का घेराव कर चुके हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *