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सिरमौर में दो भाइयों की अनोखी शादी – संविधान बना साक्षी, न पंडित बुलाया न फेरे लिए

पांवटा साहिब : पांवटा साहिब के शिलाई क्षेत्र के नैनीधार स्थित कलोग गांव में दो सगे भाइयों सुनील कुमार बौद्ध और विनोद आजाद ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए संविधान को साक्षी मानकर विवाह किया। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रेरित इस विवाह ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सुनील कुमार ने रीता से और विनोद आजाद ने रीना वर्मा से विवाह किया। दोनों भाई सरकारी सेवा में कार्यरत हैं और समाज में समानता व सुधार की दिशा में निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका कहना है कि विवाह दो दिलों का संगम है और इसे पूरा करने के लिए कर्मकांड या पारंपरिक विधियों की आवश्यकता नहीं है। समारोह में गांव के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सुनील कुमार बौद्ध और विनोद कुमार आजाद नाम के इन दोनों भाइयों ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से प्रेरित होकर पारंपरिक ब्राह्म विवाह की जगह “संवैधानिक विवाह” करने का निर्णय लिया। उन्होंने माना कि विवाह दो व्यक्तियों की समान सोच और सम्मान का बंधन है, जिसके लिए कर्मकांड नहीं बल्कि संवैधानिक मूल्यों की जरूरत है।

शादी के कार्ड से लेकर रस्में तक – सब कुछ हटके

इनकी शादी का हर पहलू समाज में नई सोच का संदेश देता दिखा। आम शादियों की तरह फूलों और देवी-देवताओं से सजे कार्ड की जगह, इन भाइयों ने अपने निमंत्रण पत्र में महात्मा बुद्ध, डॉ. भीमराव आंबेडकर और संत कबीर की तस्वीरें प्रकाशित कर लोगों को आमंत्रित किया। कार्ड पर संदेश साफ लिखा था —“हम समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों के साथ जीवन का नया अध्याय शुरू कर रहे हैं।

दो दिन तक चली रस्में – लेकिन बिन पंडित

25 अक्तूबर की शाम “मामा स्वागत” रस्म से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। 26 अक्तूबर की सुबह दोनों भाइयों की बारातें अलग-अलग गांवों — कटाड़ी और नाया — से निकलीं। सुनील ने रितु (गांव कटाड़ी) और विनोद ने रीना वर्मा (गांव नाया) के साथ विवाह किया। बरात और वरमाला जैसी परंपराएं तो निभाई गईं, मगर किसी पंडित की आवश्यकता नहीं पड़ी। विवाह के समय चारों ने मिलकर संविधान की शपथ ली और जीवनभर समानता व सम्मान से जीवन बिताने का संकल्प लिया।

समाज के लिए प्रेरणा बनी यह पहल

गांव में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया। लोगों ने कहा कि यह पहल समाज में फैल रही दिखावटी परंपराओं और खर्चीली रस्मों के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। दोनों भाई, जो सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं, ने कहा  कि “हमारा उद्देश्य सिर्फ शादी करना नहीं, बल्कि समाज में यह बताना है कि जीवनसाथी का चयन और विवाह का संस्कार इंसान के अधिकार और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए, न कि रूढ़ियों पर।

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