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सैलानियों से गुलजार ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ टॉय ट्रेन बनी सैलानियों की पहली पसंद…

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर एक बार फिर रौनक लौट आई है। त्योहारी सीजन के बीच बड़ी संख्या में सैलानी हिमाचल का रुख कर रहे हैं। राजधानी शिमला भी इन दिनों पर्यटकों से खचाखच भरी हुई है। होटल, मॉल रोड और रिज में हर तरफ रौनक दिखाई दे रही है। पर्यटन कारोबारियों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है क्योंकि सीजन की शुरुआत से ही बुकिंग्स में तेजी आई है। शिमला पहुंचने के लिए सैलानियों की पहली पसंद कालका-शिमला टॉय ट्रेन बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, 15 नवंबर तक सभी सीटें एडवांस में बुक हो चुकी हैं। ब्रिटिश काल में बनी यह टॉय ट्रेन आज भी यात्रियों के बीच उतनी ही लोकप्रिय है जितनी कभी 1903 में इसके शुरू होने के समय थी। इस ट्रेन का सफर किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं है। हरे-भरे पहाड़ों, झरनों और सुरंगों के बीच से गुजरती हुई जब यह ट्रेन शिमला पहुंचती है, तो यह यात्रा और भी यादगार बन जाती है।कालका से शिमला तक का यह रेलमार्ग करीब 96 किलोमीटर लंबा है और ब्रिटिश काल में वर्ष 1898 से 1903 के बीच बनाया गया था। इस ट्रैक पर 102 सुरंगें हैं, जिनमें सबसे लंबी बरोग टनल है, जो लगभग एक किलोमीटर से अधिक लंबी है। रास्ते में 864 छोटे-बड़े पुल और 18 सुंदर स्टेशन आते हैं, जिनमें सोलन, कुमारहट्टी, बरोग, कंडाघाट और समरहिल प्रमुख हैं। यह रेलमार्ग अपनी अनोखी बनावट और प्राकृतिक खूबसूरती के कारण दुनिया भर के यात्रियों को आकर्षित करता है। वर्ष 2008 में इस ट्रैक को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा भी दिया। ट्रेन की गति भले ही धीमी हो, लेकिन यही इसकी असली खूबसूरती है। सफर के दौरान हर मोड़, हर पुल और हर सुरंग एक नया अनुभव देता है। सैलानी कहते हैं कि पहाड़ों की गोद में चलती यह छोटी रेल उन्हें बीते दौर में ले जाती है और प्रकृति के करीब होने का एहसास कराती है। कई सैलानियों ने बताया कि दिवाली के बाद मैदानी इलाकों में जहां वायु प्रदूषण बढ़ गया है, वहीं हिमाचल की साफ-सुथरी हवा उन्हें सुकून दे रही है। ताजी हवा, हरे पहाड़ और ठंडा मौसम सब कुछ उनके मन को भा गया है। एक पर्यटक ने कहा, “टॉय ट्रेन का सफर जीवनभर याद रहेगा। पहाड़ों की खूबसूरती और सुरंगों के अंदर से गुजरती ट्रेन का रोमांच एक अलग ही अनुभव था।

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