
शिमला : हिमाचल प्रदेश में बीती रात को मंडी के कुछ इलाकों में भारी बारिश हुई है. सरकाघाट शहर में जमसाई के पशु अस्पातल के पास हाईवे एक तरफ से धंस गया है. वहीं, शिमला में बीती रात को बारिश के बाद गुरुवार सुबह से लेकर अब तक रिमझिम फुहारें पड़ रही हैं. वहीं, प्रदेश में मॉनसून की विदाई 25 सितंबर के आसपास हो सकती है. प्रदेश में मानसून की बारिश अब कम जरूर हो गई है, लेकिन राज्य की सड़कों पर हालात अभी भी बिगड़े हुए हैं. बुधवार तक कुल 586 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं. कुल्लू जिले में सबसे ज्यादा 216 सड़कें अवरुद्ध हैं, जबकि मंडी में 150 सड़कें बंद हैं. बाकी सड़कें भी अलग-अलग जिलों में विभिन्न कारणों से बंद हैं. राज्य में हालात ऐसे हैं कि चार बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग भी पूरी तरह से बंद हैं. इनमें अटारी-लेह रोड (एनएच-3), ओल्ड हिंदुस्तान-तिब्बत रोड (एनएच-5), औट-सैंज रोड (एनएच-305) और अमृतसर-भोटा रोड (एनएच-503 ए) शामिल हैं. अधिकारियों ने बताया कि इन मार्गों पर बारिश और भू-स्खलन के कारण यातायात पूरी तरह ठप है. हिमाचल में इस साल 20 जून से मानसून की शुरुआत हुई थी. इसके बाद लगातार बारिश के कारण राज्य में कई जगह भूस्खलन और सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं. मौसम विभाग की जानकारी के मुताबिक, राज्य में बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक कुल 380 लोगों की जान जा चुकी है. सिर्फ जान का ही नहीं, बल्कि आर्थिक नुकसान भी बहुत बड़ा हुआ है. सरकार की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, बारिश और उसके कारण हुई घटनाओं से राज्य को अब तक लगभग 4,306 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. कई जगह खेती, आवास और सार्वजनिक संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा है. राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने राहत और बचाव कार्यों को बढ़ा दिया है. भारी बारिश वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर लाया जा रहा है. साथ ही, अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा टालें और बंद रास्तों से गुजरने की कोशिश न करें. सड़क बंद होने और मौसम के अनिश्चित हालात को देखते हुए पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भी चेतावनी जारी की गई है. प्रशासन ने कई मार्गों पर वैकल्पिक रास्ते सुझाए हैं, लेकिन लोगों से अपील की गई है कि वे यात्रा के समय पूरी सावधानी बरतें और सरकारी निर्देशों का पालन करें. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मौसम में अब धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है, फिर भी कई इलाकों में भूस्खलन और पानी भराव की स्थिति बनी हुई है. इसके चलते यातायात को पूरी तरह बहाल होने में अभी कुछ समय लगेगा। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है. 12 से 14 सितंबर तक मध्य और उच्च पर्वतीय इलाकों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है. ऐसे में ऊना सहित अन्य मैदानी इलाकों में बारिश से राहत मिलेगी. हालांकि, शिमला, मनाली और कुल्लू सहित अन्य इलाकों में बारिश का दौर जारी रहेगा। पिछले 24 घंटों के दौरान कई स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई. इसमें मंडी के मुरारी देवी में सबसे ज्यादा 63.0 मिमी बारिश हुई. वहीं, अन्य प्रमुख स्थानों में भराड़ी 62.8 मिमी, सलापड़ 54.4 मिमी, नैना देवी 42.6 मिमी, बग्गी 36.5 मिमी, कांगड़ा 36.0 मिमी, पालमपुर 36.0 मिमी, सुंदरनगर 33.9 मिमी, मंडी 27.0 मिमी, गोहर 25.0 मिमी, कहू 18.6 मिमी और सुजानपुर टिहरा में 18.0 मिमी पानी बरसा है. इसके अलावा, कुल्लू के सेउबाग और बजौरा में 39 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं हैं।





