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स्वतंत्रता दिवस की वर्षकुण्डली दे रही है संकेत, केंद्र सरकार पर अगले वर्ष आ सकता है बड़ा संकट

हिन्दू ज्योतिष में ‘वर्ष फल’ या ‘ताज़िक पद्धति’ जन्मकालीन सूर्य के अपने जन्म समय के समान अंशों पर आ जाने के समय बनने वाली कुंडली से आगामी एक वर्ष के भविष्यकथन की पद्धति है। वर्ष कुंडली से किसी जातक (व्यक्ति) या राष्ट्र के आने वाले एक वर्ष में शुभ-अशुभ घटनाओं की संभावना बताई जा सकती है। भारत के संदर्भ में देखें तो आज़ाद भारत (15 अगस्त 1947 मध्य रात्रि दिल्ली) की कुंडली में जन्मकालीन सूर्य कर्क राशि में 27 अंश 59 कला पर स्थित है। प्रतिवर्ष सूर्य जब गोचर में कर्क राशि में इन्हीं अंशों पर आ जाते हैं तो भारत देश की वर्ष कुंडली बनती है। हिन्दू ज्योतिष में ग्रहों की गणना पृथ्वी को केंद्र में रखकर की जाती है और सूर्य को भी एक ग्रह माना जाता है इस लिए पृथ्वी द्वारा सूर्य की एक परिक्रमा में लगने वाले 365 दिन 6 घंटे और 9 मिनट के समय को सूर्य की 12 राशियों का भोग्य काल मान लिया जाता है। इसलिए वर्ष कुंडली में सूर्य के अपने जन्मकालीन अंशों पर आने का समय जन्मदिन से एक दिन आगे या कभी पीछे भी हो सकता है। इस वर्ष 14 अगस्त को भारतीय समयानुसार शाम पांच बज कर 30 मिनट पर सूर्य आज़ाद भारत के जन्मकालीन अंशों पर होगा। उस समय बनने वाली वर्ष कुंडली मकर लग्न की है जो की अगले एक वर्ष में केंद्र सरकार में बड़ी उथल-पुथल का संकेत दे रही है। वर्ष कुंडली में पीड़ित चन्द्रमा दे रहा है प्राकृतिक आपदाओं के संकेत
इस वर्ष मकर लग्न की वर्ष कुंडली में मुंथा दशम भाव में है जो की अर्थव्यवस्था, खेल जगत, विदेश व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति, स्पेस प्रोग्राम आदि में अच्छी सफलता मिलते रहने के योग हैं। भारत के बहुआयामी अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ का इस वर्ष के अंत तक प्रस्तावित प्रक्षेपण सफल रहने की पूरी सम्भावना है। किन्तु वर्ष कुंडली में स्त्री कारक ग्रह चन्द्रमा अपनी नीच राशि वृश्चिक में हो कर शनि और मंगल दोनों की पाराशरी दृष्टि से पीड़ित है जो कि महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में वृद्धि का ज्योतिषीय संकेत है। मकर लग्न की वर्ष कुण्डली में सप्तम भाव (विवाह और सेक्स) में अष्टमेश सूर्य का होना तथा अष्टमभाव (गुप्त अपराध और स्कैंडल) में ग्‍लैमर के कारक ग्रह शुक्र का वक्री बुध के साथ में आ कर वक्री शनि की सातवीं दृष्टि तथा मंगल की चौथी दृष्टि से पीड़ित होंगे बेहद अशुभ है। यह योग अगले एक वर्ष में सेक्स स्कैंडल और सनसनीखेज अपराधों के बढ़ने से केंद्र सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती पेश करेगा और समाज में भी यौन अपराधों के बढ़ने को लेकर कोई तीव्र प्रतिक्रिया आ सकती है। वर्ष कुंडली में चन्द्रमा का पाप ग्रहों शनि और मंगल से पीड़ित होंगे अगले एक वर्ष में भूकंपन से जन-धन की हानि का ज्योतिषीय योग है।

सरकार पर इन कारणों से आएगा अगले वर्ष बड़ा संकटभारत के आज़ादी के 77 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं और इस बार की वर्ष कुंडली में मुंथा दशम भाव में स्थित है। आज़ाद भारत की वृषभ लग्न की कुंडली में वर्तमान में चल रही चन्द्रमा में शुक्र की दशा दो स्त्री कारक ग्रहों की दशा होने के साथ-साथ अर्थव्यस्था के लिए और सामाजिक कानूनों के लिए भी बड़ी महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार वक़्फ़ बोर्ड एक्ट में संशोधन के साथ-साथ ‘मुस्लिम बहु -विवाह’ , ‘बच्चा गोद लेने के क़ानून’ , ‘सम्पति उत्तराधिकार के कानून’ आदि में भी संशोधन के विधायक ला सकती है जिससे सत्तारूढ़ बीजेपी का अपने सहयोगी दलों नीतीश कुमार की जदयू और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी से मतभेद बेहद तल्ख़ हो जाएगा। अगले वर्ष अप्रैल से जून के महीने में शनि और राहु की मीन राशि में युति होने के चलते केंद्र सरकार पर उसके सहयोगियों से विवाद के चलते कोई बड़ा संकट आ सकता है।

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