चंडीगढ़ः गर्मी शुरू होते ही दिल्ली-पंजाब और हरियाणा के बीच पानी को लेकर राजनीतिक लड़ाई शुरू हो जाती है और आलम यह हो जाता है कि एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो जाता है. वैसे जो मुख्य विवाद है, वो हरियाणा और पंजाब के बीच सतलुज यमुना लिंक का है, जो कि करीब 58 साल पुराना है. सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ कई बार राजनीतिक तौर पर भी इस मुद्दे को आपसी सहमति से हल कराने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ खास सफलता नहीं मिली. क्या है सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद
पंजाब से हरियाणा के अलग होने से करीब 10 वर्ष पहले 1955 में रावी और ब्यास नदी के पानी का आंकलन किया गया, जो कि 15.85 मिलियन एकड़ फीट था. फिर इसी वर्ष सरकार ने तीन राज्यों की बैठक बुलाई, जिसमें राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर शामिल था. इस बैठक में तीनों राज्यों के बीच पानी का आंवटन किया गया. जिसमें राजस्थान के हिस्से में 8, पंजाब के हिस्से में 7.20 और जम्मू-कश्मीर के हिस्से में 0.65 मिलियम एकड़ फीट पानी आया. इसके बाद साल 1966 में पुनर्गठन एक्ट के तहत पंजाब और हरियाणा दो अलग-अलग राज्य बन गए. अब फिर जो पानी पंजाब के हिस्से में था, उसे दो हिस्सों में बांटा गया और हरियाणा के 7.20 में से 3.5 मिलियन एकड़ फीट पानी दिया गया. वहीं इस फैसला का विरोध करते हुए पंजाब ने राइपेरियन सिद्धांतों का हवाला देते हुए रावी और ब्यास नदी का पानी देने से इनकार कर दिया.
1981 में सतलुज-यमुना लिंक नहर पर समझौता
1976 में केंद्र सरकार ने पानी के बंटवारे पर एक अधिसूचना जारी की. लेकिन पंजाब-हरियाणा के बीच विवाद इतना गहरा गया था कि इसको लागू करना मुश्किल हो गया था. लेकिन हरियाणा ने 1980 तक अपने क्षेत्र में नहर को लेकर परियोजना पूरी कर ली थी. दोनों राज्यों में लगातार टकराव जारी था. जब बातचीत से भी कोई हल नहीं निकला तो 1981 में सतलुज-यमुना लिंक नहर पर समझौता किया गया।
सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद की प्रमुख बातें
1982 में सतलुज-यमुना लिंक नहर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी गई
1985 में राजीव लौंगोवाल समझौता
1985 में लोंगोवाल की हत्या
1990 में सतलुज-यमुना लिंक नहर प्रोजेक्ट के इंजीनियर व मजदूरों की हत्या
1996 में सुप्रीम कोर्ट में गया मामला
2002 में नहर के शेष भाग को पूरा करने का आदेश
2004 में पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स अधिनियम
2016 में पंजाब ने पानी के बंटवारे पर नए ट्रिब्यूनल की मांग रखी
2020 में केंद्र सरकार को मध्यस्था का निर्देश
सतलुज-यमुना लिंक नहर की आधारशिला
1982 में 8 अप्रैल को पंजाब के पटियाला के कपूरई गांव में 214 किलोमीटर की सतलुज-यमुना लिंक नहर की आधारशिला रखी गई थी. इसमें से पंजाब के हिस्से में 122 किलोमीटर था और हरियाणा के हिस्से में 92 किलोमीटर. हरियाणा ने अपने हिस्से की नहर तैयार कर दी. जबकि पंजाब में उस वक्त विपक्ष में रही शिरोमणि अकाली दल के विरोध के कारण इस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया।





