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MVA में सीट बंटवारे पर सस्पेंस के बीच उद्धव करेंगे उम्मीदवारों के नामों की घोषणा, पवार के साथ चली 2 घंटे बैठक

अप्रैल यानी अगले महीने से लोकसभा चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो जाएगी. महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं. यहां पर MVA में अब तक सीटों का बंटवारा नहीं हो पाया. सोमवार को शरद पवार और उद्धव ठाकरे के बीच एक बैठक हुई, लेकिन सीटों पर सहमति नहीं बन पाई. वहीं, उद्धव आज यानी मंगलवार को अपने 15-16 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर सकते हैं. लोकसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र में सीट बंटवारे पर शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और NCP (शरदचंद्र पवार) के मुखिया शरद पवार के बीच सोमवार को दो घंटे तक बैठक हुई. हालांकि कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा, ये साफ नहीं हो पाया. इस बीच, शिवसेना (UBT) आज यानी मंगलवार को 15 से 16 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर सकती है.

उद्धव ठाकरे और शरद ठाकरे के बीच हुई बैठक की बात करें तो ये मातोश्री में हुई, जिसमें जयंत पाटिल और संजय राउत भी मौजूद रहे. इस बैठक की अहमियत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि शरद पवार खुद बातचीत के लिए मातोश्री पहुंचे थे. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस और शिवसेना के बीच कुछ सीटों को लेकर अभी भी पेच फंसा हुआ है और इसीलिए यह मीटिंग बुलाई गई थी.

जानकारी के मुताबिक, सांगली और दक्षिण मध्य मुंबई को शिवसेना (UBT) का कांग्रेस से टकराव है. अब देखना होगा कि शिवसेना (UBT) इन सीट पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा करती है या नहीं.

दरअसल, महाराष्ट्र की 48 सीटों पर प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन आघाडी की वजह से भी पेच फंसा हुआ है. प्रकाश अंबेडकर ज्यादा सीटें मांग रहे हैं, जबकि सोमवार को संजय राउत ने कहा कि उन्हें चार सीटों का प्रस्ताव दिया गया है.

NDA के पाले में RSP

MVA गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर बातचीत चली ही रही है. लेकिन इस बीच उसे बीते हफ्ते झटका भी लगा. राष्ट्रीय समाज पार्टी यानी RSP उसका साथ छोड़कर एनडीए के साथ आ गई है. RSP के अध्यक्ष महादेव जानकर 22 मार्च तक MVA के संपर्क में थे. उन्होंने बयान भी दिया था कि MVA उन्हें माढ़ा लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाए तो वो बारामती में सुप्रिया सुले को जीतने में मदद करेंगे.लेकिन महज 3 दिन बाद वह NDA में शामिल हो गए. दरअसल महादेव MVA में उद्धव गुट और कांग्रेस की नीतियों से परेशान थे. वह लगातार शरद पवार के संपर्क में थे और मांग कर रहे थे कि माढ़ा और परभणी सीट उनके हिस्से में दी जाए जिसमे माढ़ा सीट से वह खुद लड़ेंगे. लेकिन UBT और कांग्रेस की तरफ से उन्हें जवाब नहीं दिया जा रहा था. उनके जाने से बारामती सीट पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि बारामती और माढ़ा आसपास की सीटें हैं. पिछड़े वर्ग में महादेव जानकर की खासी पकड़ है और वह सुप्रिया सुले के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं।

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