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हाटी समुदाय के अनुसूचित जनजाति संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति की सैद्धांतिक मंजूरी

संगड़ाह : सिरमौर जिला के गिरीपार में रहने वाला हाटी समुदाय अब अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संशोधित अनुसूचित जनजाति विधेयक को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। अब यह विधेयक कानून बनेगा। हाटी समुदाय ने इसे ऐतिहासिक जीत करार दिया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू व राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला का भी विशेष आभार जताया है। इस संबंध में हाटी विकास मंच के अध्यक्ष प्रदीप सिंगटा, मुख्य प्रवक्ता डॉ. रमेश सिंगटा ने कहा कि केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के बूते असंभव सा काम संभव हुआ है।

उन्होंने कहा कि अप्रैल महीने में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मंच के पदाधिकारियों ने मुलाकात की थी, इस मुलाकात के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। पिछले महीने 26 जुलाई को यह विधेयक राज्यसभा से पारित हुआ था और अब इस पर राष्ट्रपति ने अपनी सहमति दे दी है। इसे अब राजपत्र में प्रकाशित किया गया है।

उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के अथक प्रयास रंग लाए हैं। उनके सम्मान में रविवार को सिरमौर के हाटी शिमला में जुटेंगे और उनका आभार जताएंगे। अध्यक्ष और मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि हाटी आंदोलन देशभर का ऐसा अनूठा आंदोलन रहा है, जहां हिंसा की एक भी घटना नहीं हुई।

56 वर्षों के संघर्ष का नतीजा सबके सामने आया है। आंदोलन की शुरुआत पिछले वर्ष महा खुमली के जरिए 1 जनवरी को रोनहाट से हुई थी। इसमें हजारों लोगों ने एसटी बनने का दृढ़ संकल्प लिया था। इसके बाद शिलाई, पझौता, संगड़ाह जैसे क्षेत्र में महाखुंबलिया हुई। इसके बाद पिछले वर्ष अप्रैल महीने में रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया में हाटी समुदाय की 14 जातियां और उपजातियां पंजीकृत हुई।

आंदोलन की जीत का यह पहला पड़ाव था दूसरा पड़ाव तब आया जब सितंबर महीने में केंद्रीय कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए एसटी का दर्जा दे दिया। इसके बाद दिसंबर महीने में लोकसभा में संशोधित एसटी विधेयक पारित हुआ। बेशक तब किंतु परंतु लगाए गए, लेकिन मौजूदा सत्र में पिछले ही महीने 26 जुलाई को राज्यसभा ने भी बिल पर अपनी मुहर लगाई।

 

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