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स्कूल बंद या मर्ज होने पर दानदाता वापस मांग रहे जमीन, शिक्षा विभाग ने तलब की रिपोर्ट

लाइव हिमाचल/शिमला: हिमाचल प्रदेश में बंद और मर्ज किए गए स्कूलों के लिए दान की गई जमीन को लेकर विवाद गहराने लगा है। गांव में शिक्षा के प्रसार और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद में जिन ग्रामीणों ने अपनी पुश्तैनी भूमि दान की थी, वे अब स्कूल बंद या मर्ज होने के बाद अपनी जमीन वापस मांग रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने सभी जिलों के प्रारंभिक व उच्च शिक्षा उपनिदेशकों से ऐसे सभी मामलों की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। वर्तमान में विभाग के पास इस बात का सटीक ब्योरा नहीं है कि ऐसे कितने स्कूल हैं जिनकी जमीन का इंतकाल (नामांतरण) अभी तक शिक्षा विभाग के नाम दर्ज नहीं हुआ है। न्यायालय में चल रहे ‘रतन साईं बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार’ मामले की सुनवाई के बीच शिक्षा विभाग ने दानपत्र, इंतकाल और जमीन से जुड़े अन्य दस्तावेजों की स्थिति का ब्योरा सरकार को उपलब्ध कराने के लिए चार श्रेणियों में जानकारी मांगी है। पहली श्रेणी में वे बंद या मर्ज हुए स्कूल हैं जिनके भूमि दान से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं; दूसरी श्रेणी में ऐसे बंद स्कूल हैं जिनके दस्तावेज तो मौजूद हैं, लेकिन दानदाता जमीन वापस मांग रहे हैं; तीसरी श्रेणी में अभी भी चल रहे वे स्कूल शामिल हैं जिनके दस्तावेज होने के बावजूद दानदाता भूमि वापस मांग रहे हैं; और चौथी श्रेणी में वे संचालित स्कूल हैं जिनकी जमीन के दानपत्र और इंतकाल की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पिछले पौने चार वर्षों में शून्य नामांकन वाले 1,526 स्कूलों को बंद (डी-नोटीफाई) किया है और पांच या उससे कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को नजदीकी संस्थानों में मर्ज किया है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो गई है।

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