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अवैध संबंध के आरोपों पर कोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी का गुजारा भत्ता रद्द, नाबालिग बेटे को मिलेंगे 5,000 रुपये

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश राकेश कैंथला की खंडपीठ ने सरकार को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं कि वहां पर कोई अवैध तरीके से प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों का कटान न हो।

शिमला: रामपुर स्थित फैमिली कोर्ट किन्नौर ने एक महत्वपूर्ण फैसले में अवैध संबंधों के आरोपों के आधार पर पत्नी को गुजारा भत्ता देने से इनकार कर दिया है, जबकि उसके नाबालिग बेटे को बालिग होने तक 5,000 रुपये प्रति माह भरण-पोषण भत्ता देने का आदेश जारी किया है। मामले में पत्नी ने पति पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए अपने और बेटे के लिए 25 हजार रुपये मासिक गुजारा भत्ते की मांग की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि महिला ने पति के साथ क्रूरता की थी और उसके द्वारा एक अन्य व्यक्ति पर दर्ज कराया गया दुष्कर्म का मामला भी जांच के दौरान वापस ले लिया गया था, जिसके चलते कोर्ट ने उसे गुजारा भत्ते का हकदार नहीं माना। वहीं, विवाह के दौरान जन्मे बेटे को कानूनन जायज ठहराते हुए कोर्ट ने पति को उसके भरण-पोषण का जिम्मा सौंपा है। उधर, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल और न्यायमूर्ति योगेश जसवाल की खंडपीठ ने अदालत से तथ्य छिपाने और गुमराह करने पर एक अन्य मामले में पति की याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट पांवटा साहिब द्वारा दिए गए गुजारा भत्ते के आदेश के खिलाफ दायर क्रिमिनल रिवीजन याचिका में 336 दिन की देरी को माफ करने की पति की अर्जी को निरस्त कर दिया। अदालत ने पाया कि पेशे से ड्राइवर होने का बहाना बनाकर एकतरफा फैसले की अनभिज्ञता जताने वाला पति वास्तव में पूरी कानूनी कार्यवाही से वाकिफ था और पूर्व में भी एकतरफा आदेश रद्द कराने के लिए अर्जी दे चुका था। ऐसे में तथ्यों को छिपाने और ठोस कारण न देने पर कोर्ट ने पति को राहत देने से सख्त इनकार कर दिया।

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