लाइव हिमाचल/शिमला: पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश को तरक्की की राह पर सबसे आगे ले जाने वाले और आधुनिक हिमाचल के शिल्पकार कहे जाने वाले स्वर्गीय वीरभद्र सिंह भले ही आज हमारे बीच सशरीर मौजूद नहीं हैं, लेकिन देवभूमि की सियासत और जन-जन के मानस पर जो अमिट छाप उन्होंने छोड़ी है, उसकी यादें आज भी हर हिमाचली के दिल में हिलोरें मारती हैं। देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रेरणा से राजनीति शास्त्र के छात्र से सीधे सियासत के शिखर तक पहुँचने वाले वीरभद्र सिंह महज 13 साल की उम्र में बुशहर रियासत के राजा बने थे, लेकिन लोकतांत्रिक हिमाचल में वे जन-जन के दिलों के राजा बनकर प्रतिष्ठित हुए। आज 23 जून को उनकी जन्म जयंती के इस भावुक अवसर पर पूरे प्रदेश में उन्हें याद किया जा रहा है। उनके पुत्र और वर्तमान लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक संदेश साझा करते हुए लिखा कि ‘शारीरिक रूप से दूर हो जाने से रिश्ते खत्म नहीं होते, वो यादों के रूप में दिल की गहराइयों में और मजबूत हो जाते हैं।’ विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि आज का दिन उनके पिता के दिखाए सत्य, सेवा और समर्पण के मार्ग को दोहराने का दिन है और वे कल भी इस माटी के ‘राजा’ थे और आज भी लोगों के दिलों के राजा हैं। इस पावन मौके पर सूबे के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सहित तमाम राजनीतिक दिग्गजों ने ‘राजा साहब’ के जनसेवा और प्रदेश विकास के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए उन्हें कोटि-कोटि नमन किया है। अगर वीरभद्र सिंह के राजनीतिक सफरनामे पर नजर डालें, तो उन्होंने साल 1962 में महासू लोकसभा सीट से बतौर सांसद अपने सफर की शुरुआत की थी और वे पांच बार लोकसभा के सदस्य व केंद्र में कैबिनेट मंत्री रहे। साल 1983 में जब कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें केंद्र से हिमाचल भेजा, तो उन्होंने रिकॉर्ड छह बार मुख्यमंत्री के रूप में देवभूमि की कमान संभाली। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका योगदान अद्वितीय माना जाता है; वे अक्सर कहा करते थे कि अगर सूबे में एक बच्चा भी होगा, तो उसके लिए भी स्कूल खोला जाएगा। उनके ही दूरदर्शी प्रयासों से शिमला के आईजीएमसी (IGMC) अस्पताल में ओपन हार्ट सर्जरी की शुरुआत हुई थी। अपनी अंतिम सांसों तक योद्धा की तरह लड़ने वाले वीरभद्र सिंह ने दो बार कोरोना को मात दी थी, लेकिन आखिरकार 8 जुलाई 2021 को वे अनंत यात्रा पर चले गए। आज उनकी जन्म जयंती के विशेष अवसर पर राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित अन्य नेताओं ने उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की, तो वहीं प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में भी विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही, वीरभद्र सिंह फाउंडेशन की ओर से आज शाम 5 बजे से रिज मैदान पर एक भव्य इंटरनेशनल प्रो-बॉक्सिंग चैंपियनशिप का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भारत समेत पांच देशों के पेशेवर मुक्केबाज अपना दम दिखाएंगे। इसके अलावा प्रदेश भर में स्वास्थ्य शिविर और सामाजिक सरोकार के कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जो युवाओं को खेलों से जोड़ने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुँचाने की ‘राजा साहब’ की सोच को सच्ची श्रद्धांजलि हैं।




