शिमला: हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पार्टटाइम कार्यकाल को पेंशन के लिए गिने जाने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने याचिका को स्वीकार करते हुए निर्णय में कहा कि पार्टटाइम जलवाहक के तौर पर 10 साल की सेवा पूरी करने पर संबंधित कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नियमितीकरण/पदोन्नत होने का अधिकार रखता है। कोर्ट ने शिक्षा विभाग को आदेश दिए कि वह याचिकाकर्ता को जिस तारीख को उसने पार्टटाइम जलवाहक के तौर पर 10 साल की सेवा पूरी की है उस तारीख से बिना किसी वित्तीय लाभ के नोशनल (काल्पनिक) नियमितीकरण/पदोन्नति प्रदान करे, ताकि याचिकाकर्ता कुलदीप सिंह पेंशन के लिए पात्र बन सके। कोर्ट ने आदेश दिए कि विभाग याचिकाकर्ता को पार्टटाइम कार्यकाल का लाभ देते हुए कानून के अनुसार उसकी सेवानिवृत्ति की तारीख से पेंशन प्रदान करे और उसे उस तारीख से पेंशन पाने का पात्र माने। बकाया राशि तीन महीने के भीतर चुकाने के आदेश दिए हैं। ऐसा न करने पर निर्णय की तारीख से छह प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज देना होगा। याचिकाकर्ता को शुरू में 14 जनवरी 1999 को धर्मशाला के डिप्टी कमिश्नर की सिफारिशों के आधार पर पार्टटाइम जलवाहक के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके बाद 28 अगस्त 2012 को उसकी सेवा को पूर्णकालिक आकस्मिक जल कर्मचारी के रूप में बदल नहीं दिया गया।




