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कुल्लू में LPG गैस संकट: इंडक्शन चूल्हों की डिमांड 20 गुना बढ़ी, बाजार में स्टॉक हुआ खत्म…

कुल्लू: मध्य-पूर्व में जारी ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है. हिमाचल प्रदेश के शांत पर्यटन स्थल कुल्लू की रसोई का बजट और मिजाज दोनों बिगाड़ गया है. वैश्विक तनाव के कारण देश भर में गैस सिलेंडरों की सप्लाई चेन चरमरा गई है, जिसका सीधा असर अब कुल्लू के बाजारों और घरों में दिखने लगा है. जहां एक ओर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत ने होटलों और ढाबों के चूल्हों को ठंडा कर दिया है, वहीं घरेलू उपभोक्ताओं में भी भविष्य के संकट को लेकर हड़कंप मचा हुआ है. इस अनिश्चितता के बीच, कुल्लू में अचानक ‘इंडक्शन चूल्हों’ की मांग में सुनामी आ गई है, जिससे दुकानदारों के पास स्टॉक कम पड़ने लगा है. जी हां… कुल्लू जिले में बीते तीन दिनों के अंदर इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि होई है. वहीं, दूसरी ओर कुल्लू जिले में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है. प्रशासन और गैस एजेंसियों ने घरेलू सिलेंडरों के वितरण के लिए नए कड़े नियम लागू कर दिए हैं, जिससे उपभोक्ता अब बेहद किफायत से गैस खर्च करने को मजबूर हैं. लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, इसी डर ने उन्हें वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर धकेल दिया है। कुल्लू के सरवरी क्षेत्र और मुख्य बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की दुकानों पर अब गैस चूल्हों से ज्यादा इंडक्शन स्टोव की पूछताछ हो रही है. व्यापारी प्रदीप शर्मा के अनुसार, ‘पहले दिन भर में मुश्किल से 1 या 2 इंडक्शन बिकते थे, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 20 से 30 तक पहुंच गया है.’ यानी बिक्री में सीधे तौर पर 20 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है.सबसे ज्यादा खरीदारी वे छात्र और कामकाजी लोग कर रहे हैं जो कुल्लू में किराए के कमरों में रहते हैं. गैस सिलेंडर न मिलने की स्थिति में उनके पास बिजली से चलने वाले ये चूल्हे ही एकमात्र सहारा बचे हैं।

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