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Dussehra 2025: महाअष्टमी से लेकर दशहरा तक, एक क्लिक में नोट करें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्र का त्योहार हर साल आश्विन महीने में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व जगत जननी आदिशक्ति देवी मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर देवी मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की भक्ति भाव से पूजा और सेवा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है। शारदीय नवरात्र के दौरान सप्तमी, दुर्गा अष्टमी और नवमी पर देवी मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है। आइए, शारदीय नवरात्र की सप्तमी, महाअष्टमी, नवमी एवं दशहरा की सही डेट एवं शुभ मुहूर्त जानते हैं।

कब है सप्तमी? (Kab hai Saptami)

वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 28 सितंबर को दोपहर 02 बजकर 27 मिनट पर होगी। वहीं, सप्तमी तिथि का समापन 29 सितंबर को शाम 04 बजकर 31 मिनट पर होगा। इस प्रकार सप्तमी तिथि 28 सितंबर को है। इस दिन शारदीय नवरात्र की सप्तमी का व्रत रखा जाएगा। साथ ही देवी मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी।

कब है अष्टमी ? (Kab hai Ashtami)

वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 सितंबर को शाम 04 बजकर 32 मिनट पर होगी। वहीं, अष्टमी तिथि का समापन 30 सितंबर को शाम 06 बजकर 06 मिनट पर होगा। महाष्टमी का व्रत 30 सितंबर को रखा जाएगा। इस शुभ अवसर पर देवी मां दुर्गा का आह्वान किया जाएगा। साथ ही जगत जननी की विशेष पूजा की जाएगी।

कब है नवमी ? (Kab hai Navami)

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 30 सितंबर को शाम 06 बजकर 07 मिनट पर होगी और 01 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 01 मिनट पर समाप्त होगी। तिथि गणना के अनुसार, 01 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी। इस शुभ अवसर पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी।

कब है दशहरा? ( Kab Hai Dussehra)

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व दशहरा (Dusshera Date 2025) मनाया जाता है। इस शुभ तिथि की शुरुआत 01 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 02 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, दशमी तिथि का समापन 02 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 10 मिनट पर होगा। इस प्रकार 02 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीराम की पूजा के लिए शुभ समय दोपहर 01 बजकर 18 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजकर 40 मिनट तक है। वहीं, विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 05 मिनट से लेकर 02 बजकर 53 मिनट तक है।

दशहरा का संयोग 

पंचांग के अनुसार इस बार दशहरे वाले दिन पूरे दिन रवि योग रहेगा, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके साथ ही, रात 12:34 बजे से सुबह 11:28 बजे तक सुकर्म योग रहेगा और इसके बाद धृति योग लग जाएगा। दशमी तिथि को एक विशेष शुभ मुहूर्त माना जाता है, जिसमें बिना किसी विशेष समय की चिंता किए सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इस दिन नए कार्यों की शुरुआत, व्यापार, प्रॉपर्टी या वाहन खरीदने के लिए उत्तम समय माना जाता है।

दशहरा की पूजा विधि

दशहरे के दिन सुबह स्नान करके घर को पवित्र करना चाहिए। घर के उत्तर-पूर्व कोने में पूजा स्थान तैयार करें और वहां गंगाजल छिड़काव कर शुद्धि करें। अपराजिता देवी को स्मरण करते हुए अष्टदल बनाएं और भगवान राम व हनुमान जी की पूजा करें। इस दिन रामायण पाठ, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ विशेष महत्व रखता है। अस्त्र-शस्त्र पूजन भी इस दिन की विशेष परंपरा है। इसमें तलवार, वाहन, किताबें और औजारों की पूजा की जाती है। पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद वितरण करें। शाम को रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

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