



कुल्लू : हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में जहां भारी बारिश के चलते करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है वहीं इस आपदा से बचने के लिए अब लोग देवी-देवताओं की शरण में भी जा रहे हैं। ऐसे में जिला कुल्लू की आराध्य देवी माता हिडिंबा के आदेशों के अनुसार जिला मुख्यालय रघुनाथपुर में छोटी जगती का आयोजन किया गया, जिसमें सभी देवी-देवताओं ने साफ कहा कि देव स्थलों से हो रही छेड़छाड़ के चलते देवी-देवता नाराज हैं और ढालपुर मैदान में छेड़छाड़ को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे में अगर प्राकृतिक आपदाओं से बचना है तो जल्द से जल्द भगवान शिव को मनाया जाए। ऐसे में अब जल्द ही भगवान बिजली महादेव को भी मनाया जाएगा। भगवान रघुनाथ जी के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि माता हिडिंबा के आदेश पर हुई छोटी जगती में देवी-देवताओं ने साफ कहा कि देवस्थानों से छेड़छाड़ न की जाए। ढालपुर मैदान में जो छेड़छाड़ की गई है उसे भी तुरंत बंद किया जाए वरना आगामी समय में इसके गंभीर परिणाम लोगों को भुगतने होंगे।
बिजली महादेव रोपवे को लेकर भी देवी-देवताओं ने नाराजगी जताई है और रोपवे का काम बंद करने को कहा गया। महेश्वर सिंह ने बताया कि सरकार के ध्यान में भी यह मामला है और सरकार भी देवताओं के आदेश को मानने के लिए तैयार है। कारदार संघ को भी देवी-देवताओं ने राजनीति से दूर रहने की हिदायत दी है।
क्या होती है जगती
दो तरह की जगती होती है। बड़ी जगती जो नग्गर कैसल में जहां 18 करड़ू देवताओं का स्थान है। इसमें देवताओं का आह्वान किया जाता है। पूछ डाली जाती है। मान्यता के अनुसार गोबर के लड्डू पानी में डाले जाते हैं। अगर ये लड्डू ऊपर आ गए तो मान लिया जाता है कि देवता मान गए।
देवताओं के मना करने पर रद हो गया 1800 करोड़ का प्रोजेक्ट
स्की विलेज को लेकर बड़ी जगती हुई थी। देवताओं के मना करने पर 1800 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट रद हो गया था। छोटी जगती दशहरा के संबंध में भी आयोजित की गई थी। यह माता हिडिंबा की अगुआई पर होती है।
संकट आने पर देव शरण में जाते हैं लोग
जब भी कुल्लू व आसपास के क्षेत्र में संकट आए तो लोग देवता की शरण में जाते हैं। संकट का समाधान कैसे होगा देवता से पूछा जाता है। देवता का निर्णय अंतिम होता है। इस बार प्राकृतिक आपदा के समाधान व बिजली महादेव रोपवे के संबंध में छोटी जगती हुई।