Home » Uncategorized » चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाइवे हुआ बहाल, मंडी-कुल्लू मार्ग पर 9 मील और कैंची मोड़ फोरलेन पर भूस्खलन के कारण सुबह लगभग 4 बजे हुआ था बाधित

चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाइवे हुआ बहाल, मंडी-कुल्लू मार्ग पर 9 मील और कैंची मोड़ फोरलेन पर भूस्खलन के कारण सुबह लगभग 4 बजे हुआ था बाधित

लाइव हिमाचल/शिमला : हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में सबसे अधिक कुदरत का कहर बरप रहा है. छोटी काशी में जुलाई महीने में दो बार आपदा आ चुकी है. सराज घाटी के बाद अब मंडी शहर में मंगलवार सुबह बादल फटने के बाद जेल रोड और पैलेस कॉलोनी में फ्लैश फ्लड आ गया. यहां पर तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि 100 से अधिक गाड़ियों को नुकसान हुआ है. उधर, मनाली में  ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ गया है और लोगों को अलर्ट रहने की अपील की गई है. जानकारी के अनुसार, बुधवार को सुबह चार बजे लैंडस्लाइड के चलते चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाईवे पंडोह में केंची मोड़ और ड्योड के पास बंद हो गया है. केंची मोड़ के पास तो हाईवे खोला गया है, लेकिन दूसरी लोकेशन पर बहाली का काम जारी है. वहीं, मंडी जिले में बीते 24 घंटे से करीब 259 सड़कें बंद हैं. आपदा प्रबंधन की मंगलवार शाम तक की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में कुल 371 रोड़ बंद हैं, जिसमें सबसे अधिक मंडी जिले में हैं.  उधर, मंडी के पद्धर में शिक्षा संस्थानों को बंद किया गया है. पधर के टिक्कन उप-तहसील क्षेत्र में सभी विंटर क्लोजिंग स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों को एक दिन के लिए बंद रखने का आदेश जारी किया गया है. उपमंडलाधिकारी पधर सुरजीत सिंह (HAS) ने आदेश जारी किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, भारी बारिश के कारण 182 ट्रांसफार्मर (DTR) भी बाधित हुए हैं. वहीं, कुल 179 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे लोगों को पीने के पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. मंडी ज़िले में 172 ट्रांसफार्मर बंद हैं. कांगड़ा ज़िले में 24 सड़कें बंद हैं और 98 जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं. चंबा, सिरमौर, हमीरपुर, शिमला और ऊना जैसे ज़िलों में भी बारिश ने असर दिखाया है। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने 30 जुलाई 2025 को प्रस्तावित किन्नर कैलाश यात्रा को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है. यह निर्णय विपरीत मौसम परिस्थितियों और यात्रा मार्ग की असुरक्षित स्थिति को देखते हुए लिया गया है. उधर, प्रदेश में इस बार का मॉनसून सीजन तबाही बनकर टूटा है. 20 जून से 30 जुलाई 2025 तक प्रदेश में भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं में अब तक 170 लोगों की जान चली गई, जबकि 36 लोग लापता हैं. 278 लोग घायल हुए हैं और हजारों लोग प्रभावित हुए हैं. प्राकृतिक आपदा के कारण 1352 मकान क्षतिग्रस्त हो गए, 1187 गौशालाएं और 294 दुकानें जमींदोज हो गईं. इसके अलावा 1402 मवेशी और 21,500 पोल्ट्री पक्षियों की भी मौत हुई है. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार अब तक हिमाचल को ₹1538 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है।

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