लाइव हिमाचल/शिमला: शिमला के चेवड़ी पंचायत में इन दिनों एक गंभीर राजनीतिक और सामाजिक हलचल देखने को मिल रही है। पंचायत के सभी प्रमुख प्रतिनिधियों ने शराब के ठेके के खिलाफ विरोध जताते हुए सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। पंचायत प्रधान छविंद्र सिंह पाल, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, महिला मंडल और नशा निवारण कमेटी के सदस्य इस विरोध में शामिल हुए हैं। दरअसल, शिमला ग्रामीण विधानसभा की चेवड़ी पंचायत के खेरा गांव में 23 मई को राज्य सरकार द्वारा शराब का ठेका खोला गया था। यह कदम न केवल स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया, बल्कि पंचायत के पदाधिकारियों ने इसे गांव के सामाजिक ताने-बाने और सार्वजनिक शांति के लिए खतरे के रूप में देखा। स्थानीय महिलाएं इस ठेके के विरोध में सड़कों पर उतरी थीं, लेकिन विरोध के दौरान पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी। यह कदम गांववासियों में गहरी नाराजगी का कारण बना, क्योंकि उन्होंने अपनी आवाज़ उठाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके अपनाए थे। पंचायत प्रधान छविंद्र सिंह पाल का कहना है कि ठेका खोलने से गांव का माहौल बिगड़ रहा है और महिलाओं की शिकायतों को अनसुना करना सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करता है।पंचायत प्रधान ने बताया कि 12 दिनों तक हड़ताल करने के बावजूद सरकार ने किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की। सरकार के इस रवैये को देखकर पंचायत के सभी पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि जिस सरकार ने नशा मुक्ति का वादा किया था, वही सरकार नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई कर रही है। शराब ठेके के विरोध में पंचायत का यह सामूहिक इस्तीफा एक बड़ा संदेश देता है कि स्थानीय समुदाय नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर कितनी गंभीर है। खेरा गांव के लोगों का कहना है कि शराब के ठेके से गांव में अपराध, हिंसा और सामाजिक असमंजस बढ़ेगा।





